प्राक्कथन इस पुस्तक के माध्यम से असाधारण रहस्य को साधारण साहस करके गोलोकधाम का वर्णन प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। इसमें जो भी विवरण है, वह शास्त्रों, प्रमाणित एवं प्रकाशित सामग्री, तथा आध्यात्मिक ग्रंथों से लिया गया है। यह पुस्तक केवल एक छोटी सी पहल है उन सभी भक्तों के लिए, जो गोलोकधाम के रहस्य और दिव्यता के बारे में विस्तृत ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। यदि इस प्रयास में किसी प्रकार की त्रुटि रह गई हो, तो मैं उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ। मेरी प्रार्थना है कि श्री राधा–कृष्ण का आशीर्वाद सदैव प्रत्येक भक्त पर बना रहे। यह पुस्तक हम सबके भीतर की आत्मिक जिज्ञासा को प्रज्वलित करे, जिससे हम अपने इस मानव जन्म को सुधारकर, श्री राधा–कृष्ण के परमधाम गोलोकधाम तक पहुँचने का प्रयास कर सकें। यह पुस्तक केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा का निमंत्रण है, जो पाठक को अपनी अंतरात्मा की गहराई में ले जाती है और याद दिलाती है कि भक्ति केवल अनुष्ठान या कर्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेम, समर्पण और आंतरिक अनुभवों का मार्ग है। पाठक इस पुस्तक के माध्यम से गोलोकधाम की दिव्यता और राधा–कृष्ण के प्रेम का अनुभव कर सकते हैं, जो जीवन को अधिक सार्थक और पूर्ण बनाता है। यह प्रयास भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने, जिससे वे अपने जीवन में आध्यात्मिक सुधार और आत्मिक शांति प्राप्त कर सकें। मेरी यह कामना है कि यह पुस्तक प्रत्येक पाठक के हृदय में श्रद्धा, भक्ति और प्रेम की अग्नि प्रज्वलित करे। मैं श्री राधा–कृष्ण के अनंत प्रेम और कृपा के सान्निध्य में स्वयं को समर्पित करती हूँ। उनका अनंत प्रेम, चरणामृत और आशीर्वाद मेरी भक्ति और जीवन का आधार हैं। सेवा में, श्रीमती (डॉ.) कीर्ति अग्रवाल
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